सुविचार 2445
चिंता इतनी करो कि काम हो जाये,
इतनी नहीं कि जिंदगी तमाम हो जाये.
इतनी नहीं कि जिंदगी तमाम हो जाये.
कि वह कभी किसी पुरुष को पीड़ित नहीं करता.
_लेकिन सज्जन [gentle] आदमी खोजना मुश्किल है.
सफल होने के लिए हमें जीवन में और अपने विचारों में बहुत से बदलाव लाने होते हैं.
यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है.
_ ” जरूरतें ” सजदा करवाती हैं, आजकल ” इबादत “कौन करता है..
_ हो सके तो खुद को भी इक बार सजदा कीजिए.
लेकिन बैठिए वहीं जहां अपनेपन का अहसास हो.