सुविचार 2389
आत्मविश्वास पैदा करती है शब्दों में मेहरबानी.
सोच में मेहरबानी गूढ़ता लाती है.
देने में मेहरबानी प्रेम पैदा करती है.
सोच में मेहरबानी गूढ़ता लाती है.
देने में मेहरबानी प्रेम पैदा करती है.
और लोग इसे कायरता, कमजोरी और बेवकूफी समझ बैठते हैं.
आप चाहें तो मुझसे बात कर सकते हैं.
I am no good talker but people have said to me many times that I am good listener, you can talk to me if you want.
क्योंकि ये जब टूटते हैं तो आवाज नहीं आती पर दर्द बहुत होता है…
मेज पर होगी तस्वीर और कुर्सी खाली रह जाएगी.
तारीफ़ आदमी के “काम” की होती है और ख़ुशामद “काम” के आदमी की.