सुविचार 2262
अपने मन को स्वस्थ रखने के लिए हम क्या पढ़ते या देखते हैं,
ऐसा कर के हम अपने आप को वैसा ही बना रहे होते हैं जाने अनजाने !!
अपने मन को स्वस्थ रखने के लिए हम क्या पढ़ते या देखते हैं,
ऐसा कर के हम अपने आप को वैसा ही बना रहे होते हैं जाने अनजाने !!
जीवन का अंत भी उसी का अच्छा हो सकता है जिसका जीवन शानदार और अच्छा रहा हो ! जीवन भर दुखी चिंतित और बुरी दशा में जीने वाला अंत समय में दुखी और चिंतित ही जाता है !!! अतः चिंता, दुःख और व्यर्थ विचारो मुक्त जीवन बिताइए, क्यूंकि इतना तो हम कर ही सकते है, क्यूंकि अंत वैसा ही होगा जैसे संस्कार हम पूरे जीवन किये कर्म और स्वभाव के अनुसार बना लेंगे !!!!
_सही कही गई कड़वी बात को बर्दाश्त करना भी शामिल होता है.!!
मन की इच्छाएं श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते हैं, जो योग्य है वही कर्म करते हैं ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!
सिर्फ वही मार्ग सही है … जिस पर तुम चलते रहो …. और कभी रुको न.