सुविचार 2332
जितना गौर से लोग टकराने के बाद एक दूसरे को देखते हैं,
उतनी गौर से अगर पहले ही देख ले तो टक्कर ही नहीं होती.
उतनी गौर से अगर पहले ही देख ले तो टक्कर ही नहीं होती.
नकारात्मक लोगों को खुश करना, आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है.
अपनी हैसियत से गिर कर बात करना उससे भी बुरा है.