सुविचार 2256
सतही बातें केवल सतह तक ही असर करती हैं.
_ और अभिमान इतना भी कम मत करना कि स्वाभिमान मिट जाए.
और हादसे के बाद समझ में आया कि कुछ मोड़ पर रुकना भी पड़ता है.
*क्योंकि, “ढ़लान” हमेशा “शिखर” से ही शुरु होती है.
साझा किया गया दुख आधा होता है.
*अगर विशाल समुद्र बनना है तो किसी के निर्णय पर अपना ध्यान ना दें| जो करना है अपने हिसाब से करें| जो गुजर गया उसकी चिंता में ना रहे| हार जीत, खोना पाना, सुख-दुख, इन सबके चलते मन विचलित ना करें| अगर जिंदगी सुख शांति से ही भरी होती तो आदमी जन्म लेते समय रोता नहीं| जन्म के समय रोना और मरकर रुलाना इसी के बीच के संघर्ष भरे समय को जिंदगी कहते हैं|*