सुविचार 2305
रास्ते की परवाह करुंगा तो मंज़िल बुरा मान जायेगी.
हमारे कर्मों की आवाज खुद- ब- खुद हमारी सफलता बताती है.
रब ने हर इंसान के लिए सफलता के लिए अलग- अलग प्रयासों की संख्या सुनिश्चित की है, जहां पहुंचते ही हमें अपनी मंजिल हासिल हो जाती है. अतः अपने प्रयासों को थमने न दें. एक दिन अचानक कामयाबी खुद आकर आपके कदम चूमेगी.
उस से अधिक एक बुद्धिमान एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न से सीख सकता है.