सुविचार 2263

एक आकलन के अनुसार, 87 प्रतिशत लोग विपरीत परिस्थितियों से थक कर अपने ध्येय और मंजिल को बीच में ही छोड़ देते हैं.

दरअसल, हम किसी की सफलता को देखते हैं, लेकिन हम उसके अंदर के जूनून का आकलन नहीं करते. यह जूनून ही है जो हमें अपने ध्येय तक पहुंचा सकता है.

सुविचार 2262

हम अपने जीवन को किस चीज से भरते हैं, ये चुनाव हमारा होता है,

अपने मन को स्वस्थ रखने के लिए हम क्या पढ़ते या देखते हैं,

ऐसा कर के हम अपने आप को वैसा ही बना रहे होते हैं जाने अनजाने !!

सुविचार 2261

चिंता और दुःख मुक्त रहे ….

जीवन का अंत भी उसी का अच्छा हो सकता है जिसका जीवन शानदार और अच्छा रहा हो ! जीवन भर दुखी चिंतित और बुरी दशा  में जीने वाला अंत समय में दुखी और चिंतित ही जाता है !!! अतः चिंता, दुःख और व्यर्थ विचारो मुक्त जीवन बिताइए, क्यूंकि इतना तो हम कर ही सकते है, क्यूंकि अंत वैसा ही होगा जैसे संस्कार हम पूरे जीवन किये कर्म और स्वभाव के अनुसार बना लेंगे !!!!

अच्छे संस्कार मे सिर्फ़ मीठा बोलना ही नही,

_सही कही गई कड़वी बात को बर्दाश्त करना भी शामिल होता है.!!

सुविचार 2260

मन की इच्छाएं …

मन की इच्छाएं श्रेष्ठ कर्मो में, अच्छे कर्मो में अक्सर बाधा खड़ी करती हैं, अतः श्रेष्ठ कर्मो को सर्वोपरि मानने वाले इच्छा से रहित होते हैं, जो योग्य है वही कर्म करते हैं ! इच्छा शेष होना, इच्छा रहित होना जीवन की श्रेष्ठतम उपलब्धि है !!!

सुविचार 2259

बच्चों को पालना, उन्हें अच्छे व्यवहार की शिछा देना भी सेवा कार्य है, क्योंकि यह उनका जीवन सुखी बनाता है.
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