सुविचार 2207

लोग अफसोस से कहते हैं की कोई किसी का नहीं, _

_ और खुद खुदसे पूछना भूल जाते हैं की हम किसके हैं ???

सुविचार 2206

“समय” “सत्ता” “संपत्ति” और “शरीर” चाहे साथ दे ना दे,

लेकिन…..”स्वभाव” “समझदारी” और “सच्चे संबंध” हमेशा साथ देते हैं…!!!!

सुविचार – कमियां निकालने के लिए लोग हैं – 2204

एक कविता कि पंक्तीयां मुझे बहुत ही बढिया लगी.…

 

तू अपनी खूबियां ढूंढ …. कमियां निकालने के लिए लोग हैं |

अगर रखना ही है कदम…. तो आगे रख ,

पीछे खींचने के लिए लोग हैं |

सपने देखने ही है …..तो ऊंचे देख,

निचा दिखाने के लिए लोग हैं |

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का ,

जलने के लिए लोग हैं |

अगर बनानी है…..तो यादें बना ,

बातें बनाने के लिए लोग हैं |

प्यार करना है…. तो खुद से कर ,

दुश्मनी करने के लिए लोग है |

रहना है…. तो बच्चा बनकर रह ,

समझदार बनाने के लिए लोग है |

भरोसा रखना है….तो खुद पर रख ,

शक करने के लिए लोग हैं |

तू बस सवार ले खुद को…

आईना दिखाने के लिए लोग हैं |

खुद की अलग पहचान बना….

भीड़ में चलने के लिए लोग है |

तू कुछ करके दिखा दुनिया को…… बस कुछ करके दिखा ,

तालियां बजाने के लिए लोग हैं…..

 

सुविचार 2203

जब तक चलेगी जिंदगी की सांसे, कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा.

कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तो, कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा.

कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तो, कहीं नाराजगियों का बहाव मिलगा.

कहीं मिलेगी सच्चे मन से दुआ तो, कहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा.

कहीं बनेंगे पराए रिश्ते भी अपने तो, कहीं अपनों से ही खिंचाव मिलेगा.

कहीं होंगी खुशामदें चेहरे पर तो, कहीं पीठ पे बुराई का घाव मिलेगा.

तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे, जैसा तेरा भाव वैसा प्रभाव मिलेगा.

रख स्वभाव में शुद्धता का “स्पर्श” तू, अवश्य जिंदगी का पड़ाव मिलेगा.

सुविचार 2202

पंछी अपने पैरो के कारण जाल में फँसते हैं….परन्तु इंसान अपनी जुबान के कारण….!

ऊँचा उठने के लिए पंखों की ज़रुरत केवल पक्षियों को ही पड़ती है….

मनुष्य तो जितना जुबान से विनम्र होगा, उतना ही ऊपर उठता है…!!

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