सुविचार 2257

जिंदगी के अनुभव से मैंने यह सीखा है कि छोटा आदमी बड़े-बड़े मौके पर काम आ जाता है और बड़ा आदमी छोटे-छोटे मौकों पर अपनी औकात दिखा जाता है !

सुविचार 2255

स्वाभिमान इतना भी मत बढ़ाना कि अभिमान बढ़ जाए,

_ और अभिमान इतना भी कम मत करना कि स्वाभिमान मिट जाए.

अभिमान और स्वाभिमान में बहुत स्पष्ट किंतु बारीक अंतर होता है..

_ अक्सर लोग अभिमान को स्वाभिमान से रिप्लेस कर देते हैं,
_ जबकि अभिमान सस्ता है और आत्म-सम्मान महंगा है,
_ लोग अभिमान अफोर्ड कर लेते हैं ..पर स्वाभिमान नहीं..
_ होता यह है कि ..लोग उन लोगों के सामने अभिमान दिखाते हैं ..जो उनसे कमज़ोर हैं..
_और जो उनसे ताकतवर हैं ..उनके सामने अपना स्वाभिमान ताक पर रख देते हैं.

सुविचार 2254

ठोकर खाने पर पता चला कि आगे बढ़ने के लिए झुकना भी पड़ता है,

और हादसे के बाद समझ में आया कि कुछ मोड़ पर रुकना भी पड़ता है.

सुविचार 2253

“सफलता” की ऊँचाईयों को छु कर कभी “अंहकार” मत कीजिए.

*क्योंकि, “ढ़लान” हमेशा “शिखर” से ही शुरु होती है.

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