सुविचार 2257
जिंदगी के अनुभव से मैंने यह सीखा है कि छोटा आदमी बड़े-बड़े मौके पर काम आ जाता है और बड़ा आदमी छोटे-छोटे मौकों पर अपनी औकात दिखा जाता है !
_ और अभिमान इतना भी कम मत करना कि स्वाभिमान मिट जाए.
और हादसे के बाद समझ में आया कि कुछ मोड़ पर रुकना भी पड़ता है.
*क्योंकि, “ढ़लान” हमेशा “शिखर” से ही शुरु होती है.
साझा किया गया दुख आधा होता है.