सुविचार 2119
बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.
बोलने से पहले सोच लिया करो, क्योंकि बोलने के बाद सोचा नहीं पछताया ही जा सकता है.
क्यूंकि डूबते देखकर लोग घर के दरवाजे बंद करने लगते हैं.
किसी भी चीज का वजन, या किसी के अपशब्द को बोझ के रूप में ज्यादा दिन तक अपने मन पर रखने से इंसान कभी आगे नहीं बढ़ सकता है.
सुबह से शाम तक आप कैसे लोगों से एक्सपोज़ होते हैं, कैसे परिवेश में रहते हैं, यह बहुत मायने रखता है. हमारे अंदर जितना पोजेटिविटी का फ्यूल रहेगा, उतना हम आगे बढ़ते रहेंगे.