मेरे विचार से असली चमत्कार जल पर या वायु में चलना नहीं है, बल्कि धरती पर चलना है. प्रतिदिन हम किसी न किसी चमत्कार में शामिल होते हैं जिसे हम पहचान भी नहीं पाते : नीला आकाश, सफ़ेद बादल, हरे पत्ते, किसी बच्चे की काली उत्सुक आँखें – हमारी अपनी दो आँखें – सबकुछ एक चमत्कार है.
जिस व्यक्ति ने अपनी खराब आदतें बदल लीं, उसका आने वाला कल भी बदल जाएगा. जिसने नहीं बदलीं, उसके साथ कल भी वही होगा जो आज तक होता आया है. इसलिए, अपने आने वाले कल को सुधारने के लिए बीते हुए कल की आदतों को बदलना जरुरी है.