सुविचार 2222
नदी में नाव के सहारे और जीवन में बुद्धि के सहारे कदम रखा जाता है.
समय का चक्र _ जब घूम- घूम कर वापस आता है.
_ इसे बेवजह चक्रव्यूह मत बनाइए..
_ हर आदमी अपने कर्मों की परिधि तय कर रहा है.. उसे और मत उलझाइए..!!
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे !!!
आप जैसे हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं.
वो अपने अस्तित्व में मस्त रहती है,
मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं,
*तुलना से बचें और खुश रहें*