सुविचार 2165

भविष्य , वर्तमान….

यदि हम जरुरत से ज्यादा ही भविष्य के बारे में सोचने लगेंगे, चिंता करने लगेंगे तो हम हमारा वर्तमान भी बिगाड़ लेंगे, अतः भविष्य के लिए उतना ही सोचना चाहिए जितना जरुरी हो ! कई लोग भविष्य की कल्पनाओं में ही डूबे रहते है याद रखिये भविष्य जब भी आएगा वर्तमान बनकर ही आयेगा यानि भविष्य आयेगा ही नहीं ! तो क्यूँ न उसी की फ़िक्र करे जिससे जीवन में दो चार होना ही है यानी सिर्फ वर्तमान के बारे मे ही सोचे !!! वैसे भी साधारण मनुष्य के भविष्य के बारे में सोची गई बाते १ या २ प्रतिशत ही साकार होती है ज्यादातर कोरी हवाई कल्पना ही सिद्ध होती है !!!

सुविचार 2164

ज़िंदगी वो हक़ीक़त है …

जिसे धारणाओ के चश्मे लगाकर नही देखा जा सकता है …

किसी भी इंसान को अच्छे से जाने बिना,

_दूसरों कि बातें सुन कर उसके प्रति कोई धारणा बना लेना मूर्खता है !

सुविचार 2162

जीवन में कोई भी कठिनाई क्यों न हो, हम शांत रहें तो हर समस्या का हल मिल जाता है.

सुविचार 2161

मन की गति असीम और अनंत है. इस पर नियंत्रण न कर पाना ही असंतोष और अनेक दुःखों का कारण है, साथ ही शायद अनंत संभावनाओं और उपलब्धियों का भी.

सत्य है, मन के हारे हार है; मन के जीते जीत.

सुविचार 2160

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सफलता को डिग्रियों या पारिवारिक पृष्ठभूमि से नहीं नापा जाता , आप कितना बड़ा सोचते हैं ,यही आपकी उपलब्धियों का आकार तय करता है.
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