सुविचार 2112
मन मिले जिससे, रिश्ता रखना उससे.
जहां कदर नहीं, वहां जाना नहीं.
जो सुनता नहीं, उसे समझाना नहीं.
जो पचता नहीं वो खाना नहीं.
जो सत्य पे भी रूठे, मनाना नहीं.
जीवन में तकलीफें आएं, घबराना नहीं.
जब वह अपने भीतर बैठे स्वार्थ को पूरी तरह से समाप्त कर देता है.
वक्त रहते अपने दिमाग़ पर काबू रखना सीख लो वरना अगर उसने आप पर काबू कर लिया तो आपको तकलीफ़ तो बहुत होगी.!!
_ अगर अपने छल पर पछतावा होता है, तो अवश्य ही उसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी.
_ यह प्रेरणा उम्र के साथ स्वतः ही उत्पन्न होती है, जो मनुष्य को अनुभवी बनाती है.