सुविचार 2112

मन मिले जिससे, रिश्ता रखना उससे.
जहां कदर नहीं, वहां जाना नहीं.
जो सुनता नहीं, उसे समझाना नहीं.
जो पचता नहीं वो खाना नहीं.
जो सत्य पे भी रूठे, मनाना नहीं.
जीवन में तकलीफें आएं, घबराना नहीं.

सुविचार 2110

इंसान का सबसे वैभवशाली सुख और स्थायी शांति तब ही प्राप्त होती है,

जब वह अपने भीतर बैठे स्वार्थ को पूरी तरह से समाप्त कर देता है.

सुविचार 2109

जो व्यक्ति अमीरी में खुशियाँ खोजता है, वह इस दुनिया का सबसे भ्रमित व्यक्ति है.
अमीरी आपके दिमाग़ में है-

वक्त रहते अपने दिमाग़ पर काबू रखना सीख लो वरना अगर उसने आप पर काबू कर लिया तो आपको तकलीफ़ तो बहुत होगी.!!

_ जब तक कमाना नहीं आएगा, तब तक सम्भालना भी नहीं आएगा !
_ अपने बच्चों को पैसे देकर अमीर बनाने की कोशिश मत कीजिए..
_ पर कमाने की विद्या और जीने का ढंग सिखाइए !
_ ज़िंदगी को गमलों के पौधों की तरह मत बना देना.. जिसे हर समय देख-रेख और सहारा चाहिए..
_ बल्कि पहाड़ों में उगते हुए पौधों की तरह बनो जिनका कोई ध्यान नहीं रखता, फिर भी हरे-भरे है …
_ कब तक सहारा तलाशते रहोगे.. ज़िंदगी कमजोर बनेगी..
_ जब ख़ुद अपना सहारा बनोगे “ज़िंदगी लहलाने लग जाएगी” !!

सुविचार 2108

धैर्य रखा करो, क्योंकि मुश्किलों का हल मुश्किलों में ही कहीं छुपा रहता है.

सुविचार 2107

अपनी बीती जिंदगी का स्वार्थ से परे खालीपन में अवलोकन करें, तो पता चलेगा आपने कहां छल- कपट से जीत हासिल की और कहां ईमानदारी से.

_ अगर अपने छल पर पछतावा होता है, तो अवश्य ही उसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी.

_ यह प्रेरणा उम्र के साथ स्वतः ही उत्पन्न होती है, जो मनुष्य को अनुभवी बनाती है.

खुद को देखें और स्वयं का अवलोकन करें, जब हम स्वयं का अवलोकन करते हैं, तो एक स्वाभाविक और करने योग्य क्रिया उत्पन्न होती है.

_ अन्यथा, हमारे द्वारा की जाने वाली क्रियाएँ जबरन और ज़बरदस्ती वाली होंगी,
और ज़बरदस्ती करने से हम थक जाते हैं.!!
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