सुविचार 2005

ज्यादातर असफल लोग अपनी खराब आदतों, उल्टी सोच, एवं भोगी शरीर के गुलाम होते है.

सुविचार 2004

इंसान कुछ भी करे, रचनात्मक होना चाहिए. यही तो आनंद है जिंदगी का कि आप अपने समय का सदुपयोग कैसे करते हैं या अपनी ऊर्जा को कैसे कामों में लगाते हैं या मन को कैसे व्यस्त रखते हैं. इन सब बातों पर विचार करें.

इसलिए रचनात्मक, क्रियात्मक कार्य करते रहें. खुल कर जीयें ! खिलकर जीयें ! सड़ कर नहीं जीना चाहिये. मन की पुरानी आदत है, वह खिलानेवाली बातों को भूल ही जाता है.

सुविचार 2002

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार,

किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार,

किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार…जीना इसी का नाम है.

सुविचार 2001

खूबसूरती बाहर के रूप में नहीं है बल्कि इंसान अंदर से किसके साथ जुड़ा हुआ है, इसमें है ;

अतः सुंदर चीज के साथ रहें और आप भी सुंदर बन जाएँ.

सुविचार 2000

काम करते समय एकसाथ कई काम करने के बजाय एक बार में एक या दो कामों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि इस से हमारे कार्य पूर्ण होंगे और अपने कार्यों को पूरा होते हुए देखने से हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और खुशी भी.
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