सुविचार 1977
किसी भी महान कार्य में किसी को वंचित करना, यह उन्हें वंचित करना नहीं, बल्कि स्वंयम को उस महान कार्य से वंचित करना है.
एक ‘; मुस्कुराहट ‘; और दूसरी ‘; दुआ ‘;,
हमेंशा बांटते रहिए !! हमेंशा बढ़ती रहेंगी !!
बल्कि इतना ही बोलो की लोग आप के बोलने का इन्तजार करें.
जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती है.