सुविचार 1891

इस अस्तित्व में किसी का पात्र भी खाली नहीं है, सब भरे हैं …… अस्तित्व किसी के साथ अन्याय नहीं करता ….!! बस अंतर है तो सिर्फ इतना, जितना आपका पात्र खाली होगा उतना ही भरेगा. किसी का पात्र छोटा होगा तो उसने उसको उतना ही भर दिया.

सुविचार 1890

मुस्कुराहट आपके चेहरे की चमक है, आप के दिमाग को ठंडा रखने की विधि है और आपके हृदय को मधुर रखने का आधार है, इसलिए सदैव मुस्कुराते रहें.

सुविचार 1889

टुटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन, जिंदगी में कभी दुबारा वापस नहीं मिलता.

दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं.

सुविचार 1888

जब भी हम मुश्किलों से घिरते हैं तो उसके आगे घुटने तक देते हैं. उससे बाहर निकलने का प्रयास करना छोड़ देते हैं. लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो विपरीत परिस्थिति में भी प्रयास करना नहीं छोड़ते हैं, ऐसे लोग ही रिकार्ड बनाते हैं.

सुविचार 1887

भुलक्कड़ बनिए …..[ कुछ बातों में ]

 

पीछे छुट गई बातों और चीजों को भूल जाइए …..

दुःख तकलीफ और अपमान को भूलिए,

इतने व्यस्त रहिये की झगड़ो को भूल जाए ,,,

इतने ताक़तवर बनो की क्रोध को भूल जाओ ,,,

जीवन शक्ति का क्षय चिंता -घृणा -स्वार्थ – इर्ष्या -कामुक चिंतन आदि विचारों से होता है,

अतः ऐसे विचारों को भुल् जाइए ….

सुविचार 1886

यह दुनिया किसी के बिना नहीं रूकती लेकिन हम सब इसी भ्रम में जीते हैं, हमारे बाद हमारे अपनों का क्या होगा ?
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