सुविचार 1891
इस अस्तित्व में किसी का पात्र भी खाली नहीं है,
सब भरे हैं …… अस्तित्व किसी के साथ अन्याय नहीं करता ….!! बस अंतर है तो सिर्फ इतना, जितना आपका पात्र खाली होगा उतना ही भरेगा. किसी का पात्र छोटा होगा तो उसने उसको उतना ही भर दिया.
दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं.
पीछे छुट गई बातों और चीजों को भूल जाइए …..
दुःख तकलीफ और अपमान को भूलिए,
इतने व्यस्त रहिये की झगड़ो को भूल जाए ,,,
इतने ताक़तवर बनो की क्रोध को भूल जाओ ,,,
जीवन शक्ति का क्षय चिंता -घृणा -स्वार्थ – इर्ष्या -कामुक चिंतन आदि विचारों से होता है,
अतः ऐसे विचारों को भुल् जाइए ….