सुविचार 1959

सबसे ज्यादा गुस्सा उस वक़्त आता है,

जब कोई खुद गलत होकर भी आपको गलत साबित करने की कोशिश करे.

सुविचार 1958

कितना ही समय बीत जाए जब तक हम किये कर्म का फल नहीं भोग लेते वो कर्म क्षीण नहीं होता, शुभ अशुभ जैसे भी हम कर्म करते हैं उनका फल भोगना ही पड़ता है ! अतः कर्म करते समय उसके फल की चाह ध्यान में नहीं रखे किन्तु उसके परिणाम को कभी न भूले !!!

सुविचार 1957

निखर कर बिखर जाये वो “कर्तव्य” है,

और जो बिखर कर निखर जाए वो “व्यक्तित्व” है…!!

सुविचार 1956

कोई एक छोटा सा नकारात्मक विचार, हमें कई दिनों तक निराश कर सकता है

और एक छोटा सा सकारात्मक विचार, हमारी निराशा को पल भर में दूर कर सकता है.

सुविचार 1955

बेईमानों में एक ग्रंथि होती है,

अपनी बेईमानी को अपनी बुद्धिमानी समझ़ने की.

जिनके भीतर ईमान ज़िंदा है, वो ही पूरी तरहा ज़िंदा हैं,

बेईमान को तो वहम है जिंदगी का.

सुविचार 1954

दया जरूर सीखो, दया अपनाने का मतलब दूसरों की जिंदगी को सम्मान देना.

One must learn the virtue of compassion. Being compassionate
means to respect other lives.
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