सुविचार 1888

जब भी हम मुश्किलों से घिरते हैं तो उसके आगे घुटने तक देते हैं. उससे बाहर निकलने का प्रयास करना छोड़ देते हैं. लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो विपरीत परिस्थिति में भी प्रयास करना नहीं छोड़ते हैं, ऐसे लोग ही रिकार्ड बनाते हैं.

सुविचार 1887

भुलक्कड़ बनिए …..[ कुछ बातों में ]

 

पीछे छुट गई बातों और चीजों को भूल जाइए …..

दुःख तकलीफ और अपमान को भूलिए,

इतने व्यस्त रहिये की झगड़ो को भूल जाए ,,,

इतने ताक़तवर बनो की क्रोध को भूल जाओ ,,,

जीवन शक्ति का क्षय चिंता -घृणा -स्वार्थ – इर्ष्या -कामुक चिंतन आदि विचारों से होता है,

अतः ऐसे विचारों को भुल् जाइए ….

सुविचार 1886

यह दुनिया किसी के बिना नहीं रूकती लेकिन हम सब इसी भ्रम में जीते हैं, हमारे बाद हमारे अपनों का क्या होगा ?

सुविचार 1885

कर्म का नियम कहता है, जब हम कर्मों के परिणाम की चिंता छोड़ कर कोई कर्म करते हैं तो सफलता उसी समय मिल जाती है.

सुविचार 1884

परिवर्तन…

दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है ! निज अनुशासन, तब पर अनुशासन वाली बात के हिसाब से जो भी बातें या व्यवहार आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले उसमे स्वयं को ढाले, स्वयं के व्यवहार में वो बाते लायें ! तभी परिवर्तन की उम्मीद लगाएं और तभी परिवर्तन सार्थक होगा ! दूसरों के लिए नियम और सिद्धांत बनाना और बताना तो हर कोई कर सकता है, पर पहले स्वयं पालन कीजिये !!!

सुविचार 1883

जीवन में सफलता के लिए आपको शांति, सुखद एवं खुशहाल रहने की कला सीखनी होगी. चाहे कोई भी स्थिति या संकट हो, हम अपने शांत स्वभाव को नहीं छोड़ेंगे. शांतचित्त अवस्था में रहनेवाले व्यक्ति ही व्यावहारिक तरीके से सोचते हैं. वह सही निर्णय लेने में सछम होते हैं और किसी भी स्थिति में पलायनवादी मनोवृत्ति को आने नहीं देते. सफलता के लिए हमें स्वतंत्र रूप से अन्वेषण और स्पष्ट विचार करना होगा. इसके बाद बिना किसी संकोच के प्रयास को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कार्य करना होगा.

यह कठिन कार्य है, क्योंकि बचपन से ही हमारा मानस, हमारी चिंतन प्रणाली का आधार सत्य और ईमानदारी पर आधारित होता है. सृजनात्मक एक मानसिक एवं भावनात्मक मनोवृत्ति है, जो सभी प्रकार के ज्ञान एवं अनुभव को एक नये परीप्रेछ्य में अवलोकन करता है. इसके कारण नये विचारों के आविर्भाव में सहायता मिलती है. मौलिक प्रक्रिया की योजना बनाने और सर्वश्रेष्ठ सेवा तथा उत्पाद के आविष्कार का राह बनाता है, ताकि मानवता की सेवा और बेहतर तरीके से किया जा सके. सृजन तभी संभव है, जब हम चिंतन करें. यह एक साथ अभिनव प्रयोग, नवीन शुरुआत, रचना और भविष्य के सही मूल्यांकन का सम्मिलित रूप है.

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