सुविचार 1955
अपनी बेईमानी को अपनी बुद्धिमानी समझ़ने की.
बेईमान को तो वहम है जिंदगी का.
अपनी बेईमानी को अपनी बुद्धिमानी समझ़ने की.
बेईमान को तो वहम है जिंदगी का.
वो तुम्हारी बची हुई हिम्मत को भी खत्म कर देगा.
हर बात को ध्यानपूर्वक मन लगाकर सुनना चाहिए, सुनने के बाद यदि जरुरी हो तो गुनना याने उस पर विचार करना चाहिए जब अच्छी तरह समझ आ जाए तब उत्तर देना चाहिए, यदि आप ऐसा करते है तो यकीं मानिये आप कई समस्याओं और विवादों से बच जायेंगे !!!
कोई बात तत्काल उसी समय समझ में आ जाती है, कोई कुछ घंटो में समझ आती है, कुछ को कुछ दिन, किसी बात को कुछ महीने और साल लग जाते हैं, कुछ बात दुसरे के दृष्टी कोण से सही होने पर भी हमें समझ नहीं आती, अतः बहस बहुत विचार कर करें और किसी बात को प्रतिष्ठा का प्रश्न कभी न बनायें !!