सुविचार 1840

दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए,

अन्न के कण को और आनंद के छण को.

सुविचार 1838

भूत भविष्य और वर्तमान…..

वर्तमान को सुधारिए, भविष्य अपने आप सुधर जाएगा ! जो भविष्य की ज्यादा फ़िक्र करता है उसका वर्तमान बिगड़ने लगता है! अतः भूत भविष्य की ज्यादा न सोचे वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करे ! क्यूंकि गुजरा हुआ समय  आता नहीं और जो आता है वो भी वर्तमान बनकर ही आता है !!

सुविचार 1837

यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में लें,

कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी “अन्न दान” है.

सुविचार 1836

लाख जमाने भर की डिग्रीयाँ हो हमारे पास,

अपनों की आँखों से छलकते आँसू नहीं पढ़ पाये तो “अनपढ़” हैं हम.

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