सुविचार 1889

टुटा हुआ विश्वास और छूटा हुआ बचपन, जिंदगी में कभी दुबारा वापस नहीं मिलता.

दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं.

सुविचार 1888

जब भी हम मुश्किलों से घिरते हैं तो उसके आगे घुटने तक देते हैं. उससे बाहर निकलने का प्रयास करना छोड़ देते हैं. लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो विपरीत परिस्थिति में भी प्रयास करना नहीं छोड़ते हैं, ऐसे लोग ही रिकार्ड बनाते हैं.

सुविचार 1887

भुलक्कड़ बनिए …..[ कुछ बातों में ]

 

पीछे छुट गई बातों और चीजों को भूल जाइए …..

दुःख तकलीफ और अपमान को भूलिए,

इतने व्यस्त रहिये की झगड़ो को भूल जाए ,,,

इतने ताक़तवर बनो की क्रोध को भूल जाओ ,,,

जीवन शक्ति का क्षय चिंता -घृणा -स्वार्थ – इर्ष्या -कामुक चिंतन आदि विचारों से होता है,

अतः ऐसे विचारों को भुल् जाइए ….

सुविचार 1886

यह दुनिया किसी के बिना नहीं रूकती लेकिन हम सब इसी भ्रम में जीते हैं, हमारे बाद हमारे अपनों का क्या होगा ?

सुविचार 1885

कर्म का नियम कहता है, जब हम कर्मों के परिणाम की चिंता छोड़ कर कोई कर्म करते हैं तो सफलता उसी समय मिल जाती है.

सुविचार 1884

परिवर्तन…

दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है ! निज अनुशासन, तब पर अनुशासन वाली बात के हिसाब से जो भी बातें या व्यवहार आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले उसमे स्वयं को ढाले, स्वयं के व्यवहार में वो बाते लायें ! तभी परिवर्तन की उम्मीद लगाएं और तभी परिवर्तन सार्थक होगा ! दूसरों के लिए नियम और सिद्धांत बनाना और बताना तो हर कोई कर सकता है, पर पहले स्वयं पालन कीजिये !!!

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