सुविचार 1912

“दर्पण” जब चेहरे का दाग दिखाता है, तब हम “दर्पण” नहीं तोडते, बल्की “दाग” साफ करते हैं, उसी प्रकार, हमारी “कमी” बताने वाले पर “क्रोध” करने के बजाय अपनी “कमी” को दूर करना चाहिए न की कमी बताने वाले से रिश्ता तोडना चाहिए.

सुविचार 1911

दूसरों को स्वयं से नाजायज फायदा उठाने देना, परोपकार नहीं बल्कि मूर्खता है.

सुविचार 1910

क्रोध मनुष्य को अधिकतर तब आता है, जब वह अपने आप को कमजोर या हारा हुआ पाता है.

सुविचार 1909

मनुष्य के सारे दुःख-दर्दों की जड़ उसके ‘मन’ के उपद्रव हैं. अतः विश्व में से ‘‘दुःख-दर्द’’ गायब करने का एक ही उपाय है कि मनुष्य को ‘मन’ की कार्यप्रणाली बाबत ठीक से शिक्षित किया जाए.
अगर लोग शिक्षित नहीं हैं, तो वे सवाल नहीं कर सकते ;

_यदि वे सवाल नहीं कर सकते, तो वे कुछ भी नहीं बदल सकते.!!

सुविचार 1908

प्रेम में जयपराजय नहीं होती. वहां तो दो का भेद नष्ट हो कर एकीकरण हो जाता है. – आचार्य चतुरसेन

सुविचार 1907

जीवन में अगर “खुश” रहना है तो,

स्वयं को एक “शांत सरोवर” की तरह बनाएं…..

जिसमें कोई “अंगारा” भी फेंके तो..खुद बख़ुद ठंडा हो जाए…..!!!!

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