सुविचार 1889
दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं.
दूसरा मौका सिर्फ कहानियाँ देती हैं, जिन्दगी नहीं.
पीछे छुट गई बातों और चीजों को भूल जाइए …..
दुःख तकलीफ और अपमान को भूलिए,
इतने व्यस्त रहिये की झगड़ो को भूल जाए ,,,
इतने ताक़तवर बनो की क्रोध को भूल जाओ ,,,
जीवन शक्ति का क्षय चिंता -घृणा -स्वार्थ – इर्ष्या -कामुक चिंतन आदि विचारों से होता है,
अतः ऐसे विचारों को भुल् जाइए ….
दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है ! निज अनुशासन, तब पर अनुशासन वाली बात के हिसाब से जो भी बातें या व्यवहार आप दूसरों में देखना चाहते हैं, पहले उसमे स्वयं को ढाले, स्वयं के व्यवहार में वो बाते लायें ! तभी परिवर्तन की उम्मीद लगाएं और तभी परिवर्तन सार्थक होगा ! दूसरों के लिए नियम और सिद्धांत बनाना और बताना तो हर कोई कर सकता है, पर पहले स्वयं पालन कीजिये !!!