सुविचार 1718

स्वयं की सन्तुष्टता ही विश्व की सन्तुष्टता का कारण है, इसलिए वह कार्य करें जिससे पहले आप संतुष्ट हो जाएं.

सुविचार 1717

इतनी जल्दी दुनिया की कोई चीज नहीं बदलती, जितनी जल्दी आदमी की नियत और नजरें बदलती हैं.

सुविचार 1716

किसी भी कार्य को लगातार न करें. ऐसा करने से आप को थकान होगी और आप को आलस घेर लेगा. कार्य करते हुए बीचबीच में ब्रेक या रैस्ट लेते रहें. इस तरीके से आलस आप के पास नहीं आएगा और आप वर्क को आसानी से पूरा कर लेंगे.

सुविचार 1715

चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे जब तक आप उन्हें उपयोग में नहीं लाते.

सुविचार 1714

साथ साथ ..

संतुष्टता और ख़ुशी दोनों साथ साथ रहते है, एक के बगैर दूसरा नहीं होता ! इन गुणों के वजह से लोग आपकी और आकर्षित होते है !!!

सुविचार 1713

आदमी का मन इस तरह बना हुआ है कि वह शक्ति का प्रतिशोध करता है और कोमलता से झुक जाता है.
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