सुविचार 1839
उलझनें मीठी भी हो सकती हैं, जलेबी की मिठाई इसका सुबूत हैं.
वर्तमान को सुधारिए, भविष्य अपने आप सुधर जाएगा ! जो भविष्य की ज्यादा फ़िक्र करता है उसका वर्तमान बिगड़ने लगता है! अतः भूत भविष्य की ज्यादा न सोचे वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करे ! क्यूंकि गुजरा हुआ समय आता नहीं और जो आता है वो भी वर्तमान बनकर ही आता है !!
कि कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो यह भी “अन्न दान” है.
अपनों की आँखों से छलकते आँसू नहीं पढ़ पाये तो “अनपढ़” हैं हम.