सुविचार 1787
बहस सिर्फ यह सिद्ध करती है कि कौन सही है,
जब की बातचीत यह तय करती है कि क्या सही है.
जब की बातचीत यह तय करती है कि क्या सही है.
क्योंकि…शक़, सदा सोने की शुद्धता पर किया जाता है…कोयले की कालिख पर नही.
मगर वही दिल ख़ामोश और शांत बना रहता है, जब हम सही निर्णय लेते हैं.
शिकायत करना, मिन्नतें करना, मनाना और फिर दिल ऐसा हो जाता है,
कि कोई बात करे तो ठीक, ना करें तो भी ठीक,
क्योंकि पता लग चुका होता है, कि दुनिया बहुत झूठी और मतलबी है.