सुविचार 1827

विचारों से मुक्त अवस्था ही जागरण है.

आप का चैतन्य स्वरूप विचारों के कारण धुंधला हो जाता है.

सुविचार 1826

दूसरों को समझना समझदारी है, लेकिन खुद को समझना सच्ची समझदारी है.

दूसरों को नियंत्रित करना बल है, लेकिन खुद को नियंत्रित करना वास्तविक आत्मबल है.

सुविचार 1824

भाग्य को और दूसरों को दोष क्यों देना जब सपने हमारे है तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहिए !!!

सुविचार 1822

माना कठिनाई आने से आदमी अकेला हो जाता है,

पर कठिनाई आने पर ही अकेला व्यक्ति मजबूत होना सीख जाता है.

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