सुविचार 1827
विचारों से मुक्त अवस्था ही जागरण है.
आप का चैतन्य स्वरूप विचारों के कारण धुंधला हो जाता है.
आप का चैतन्य स्वरूप विचारों के कारण धुंधला हो जाता है.
दूसरों को नियंत्रित करना बल है, लेकिन खुद को नियंत्रित करना वास्तविक आत्मबल है.
पर कठिनाई आने पर ही अकेला व्यक्ति मजबूत होना सीख जाता है.