सुविचार 1656

“परेशानिया” चाहे जितनी हो, “चिंता” करने से और ज्यादा “खामोश” होने से बिलकुल “कम”

“सब्र” करने से “खत्म” हो जाती हैं, और मालिक का “शुक्र” करने से “खुशियों” मे बदल जाती है.

सुविचार 1655

कितनी ही गलतियाँ हम करने के बाद भी हम खुद को प्यार करते हैँ, पर दुसरोँ की एक गलती पर भी उसे नफरत करते हैँ, क्यूँ ? किसीसे नफरत करने से पहले सोचिए…..

सुविचार 1654

जो आदमी अपनी कमी में भी आनंद मनाता हुआ खुश रहता है, उसे जीना आ गया है.

The person, who enjoys and stays happy despite having less, knows how to live life.

सुविचार 1653

मन को इच्छाओं का ग़ुलाम बना लेना, अपने शरीर के साथ क्रूरता करना है.

सुविचार 1652

हम जो कुछ है, जो हमारे अंदर है, वो हमारे व्यवहार से प्रकट होता है.

 

Who we are and whatever we feel, it all manifests in our character.
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