शब्दों की ताकत असीम होती है, इसलिए इन्हें बहुत सोच समझ कर व्यवहार में लाना चाहिए. शब्द लगाव करते हैं तो घाव भी देते हैं, और एक बार यदि हमारे मुँह से निकल गए तो वापस कदापि नहीं लिए जा सकते हैं.
हम खुशी को पाने की सौ कोशिश करते हैं, पर वह खुशी कुछ पलों में जाती रहती है. ऐसी कौन सी खुशी है जो हमारे साथ हमेशा रह सकती है ? यह है अंदरूनी खुशी यदि हम अंदर से खुश रहते हैं, तो बाहर उसका प्रभाव भी सुखद होता है.