सुविचार 1320

दरअसल विचार या सोच कितना ही अच्छा हो, यदि उन पर आचरण या अमल नहीं किया जा रहा है, तो वे निरर्थक हैं.

सुविचार 1319

लोग अपनी जरुरत के हिसाब से कम और दूसरों की देखा- देखी ज्यादा सामान खरीद लेते हैं.

इस प्रवृत्ति के लोग यह ध्यान नहीं देते कि जो सामान वो खरीद रहे हैं. वह उनके काम लायक है भी या नहीं.

सामान अपनी जरुरत के हिसाब से खरीदें, दूसरों को देख कर नहीं. इससे फिजूलखर्ची नहीं होगी.

हम अक्सर ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जिनकी हमें जरूरत नहीं होती और उन चीजों के पीछे भागते हैं जिनसे संतुष्टि नहीं मिलती.

_ ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अपनी धारणाओं को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं कि _बाकी सभी का जीवन कितना अच्छा चल रहा होगा.

सुविचार 1318

आपके ह्रदय में वह विशाल समुद्र है, जिसे हम प्रेम कहते हैं.

उसकी चाभी आपके हाथों में है.

सुविचार 1317

अच्छा स्वास्थ, अच्छा चिन्तन, अच्छे कर्म जब इन्सान के होते हैं तो फिर उससे उसका आनन्द कोई छीन नहीं पाता, फिर वह स्वयं भी आनन्द में रहता है और दूसरों को भी आनन्द बाँटता है.

सुविचार 1316

दुःख सहने वाला तो आगे चल कर सुखी हो सकता है, पर दुःख देने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता.

सुविचार 1315

चतुर व्यक्ति दुनिया को अपनी इच्छा अनुसार चलाने की कोशिश करता है. बुद्धिमान व्यक्ति स्वयं को दुनिया के अनुरूप बना लेता है.
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