सुविचार – “इंसानियत गंवा रहे हैं हम.!!” -1064

“इंसानियत गंवा रहे हैं हम.!!”

_ खूब तरक्की कर रहे हैं ना हम… खुद को झोक दिया है पैसा कमाने के लिए घर में सुख सुविधा भरने के लिए.. जब की अंदर से मन खाली है.
_ कहां से कहां पहुंच गए विकास के नाम पर.. हमे पता ही नही पीछे क्या छूट रहा है ???
_ कुछ रेत की तरह मुट्ठी से फिसल रहा है …जिसे सब हम जान रहे हैं…
_ जीवन की दौड़ इतनी तेज हो गई है कि उसको बचाने की चाहत रही नहीं है किसी में…वो है. ” हमारे अंदर की भावनाएं”
_ पहले पड़ोसी के घर में भी कुछ होता था ना उनके साथ साथ अगल-बगल रोज दुखी हो जाते थे …अब तो कोई फर्क नहीं पड़ता …
_ सीधी सी बात है.. सीधा सा कहना है लोगों का… अपने काम से मतलब रखिए ज्यादा अच्छा रहेगा भैया.. हम तो किसी के बीच में बोलते नहीं है..
_ और यह चीज अनायास …बोलते बोलते प्रथा के रूप ले रही है,
_ जबकि वास्तव में अगर हम इंसान है तो, इंसान को इंसान की जरूरत पड़ेगी ही…
_ हम समझ नहीं रहे हैं, हम क्या दे रहे हैं… अपने अगली पीढ़ी को… नकलीपन… अकेलापन… एकाकीपन..!!
_ जाने अनजाने हम उनको स्वार्थी बना रहे हैं खुद को स्वार्थी बन रहे हैं और आधुनिकता के नाम पर अपने आप को हमने मशीन बना लिया है …
_ जहां हम हर बात का हिसाब रखने लगे हैं हंसने का भी रोने का भी…
_ कब हमें हंसना है और कब हमें रोना है..
_ इतने हम प्रैक्टिकल हो गए हैं कि अपने इमोशंस को दिखाने में भी डरने लगे हैं कि लोग क्या कहेंगे और कहीं ना कहीं हमें भी दूसरों के भावनाएं नकली और कागजी लगने लगी हैं…
_ चीजों को तो हम बचा रहे हैं… इंसानियत गंवा रहे हैं.!!

सुविचार 1063

इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ, जो बीते हुए समय को खरीद सके.

इसलिए हर पल खुश होकर जियो, व्यस्त रहो, पर साथ में मस्त रहो, सदा स्वस्थ रहो.

सुविचार 1062

गुण से भरी हुई बातें अपना लेनी ही चाहिए, उनका कहने वाला कोई भी क्यों न हो.

सुविचार 1061

किसी भी व्यक्ति से अत्यधिक लगाव हानिकारक है, क्योंकि लगाव उम्मीद की ओर ले जाता है और उम्मीद दुख का कारण बनती है.

सुविचार – छोड़ दीजिए – 1060

 

*छोड़ दीजिए*

एक दो बार समझाने से यदि कोई नही समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना, _*छोड़ दीजिए*

बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना, _ *छोड़ दीजिए।*

गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं जुड़ते तो उन्हें, _*छोड़ दीजिए।*

एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना, _  *छोड़ दीजिए।*

अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना, _ *छोड़ दीजिए।*

यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना, _ *छोड़ दीजिए।*

हर किसी का पद, कद, मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना, _ *छोड़ दीजिए।*

बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना, _ *छोड़ दीजिए।*

उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना, _ *छोड़ दीजिए।* 

 

 

 

 

 

सुविचार 1059

अगर आप अपनी जिम्मेदारी खुद ले लेते हैं तो आप में अपने सपने सच करने की चाहत अपने आप विकसित हो जाएगी.
error: Content is protected