सुविचार 1070

इंसान तब समझदार नहीं होता जब वो बड़ी- बड़ी बातें करने लगे, बल्कि समझदार तब होता है जब वो छोटी- छोटी बातें समझने लगे.

सुविचार – खुश रहकर गुजारो, तो मस्त है जिदंगी – 1069

खुश रहकर गुजारो, तो मस्त है जिदंगी,

दुखी रहकर गुजारो, तो त्रस्त है जिंदगी !
तुलना में गुजारो, तो पस्त है जिंदगी !
इतंजार में गुजारो, तो सुस्त है जिंदगी !
सीखने में गुजारो, तो किताब है जिंदगी !
दिखावे में गुजारो, तो बर्बाद है जिदंगी !
मिलती है एक बार, प्यार से बिताओ जिदंगी !
जन्म तो रोज होते हैं, यादगार बनाओ जिंदगी !
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि.. ‘आपको हमेशा खुश रहने का रहस्य पता लगाना होगा.’

_ ख़ुश रहने के लिए आपके पास बड़ी मात्रा में मूल्यवान सामग्री होना ज़रूरी नहीं है.
_ जो सामग्री और वस्तुएँ हम एकत्रित करते हैं, वे आनंद नहीं लातीं.
_ हमारे मन की किसी गलत धारणा के कारण संसार की वस्तुएँ आनन्द लाने वाली प्रतीत होती हैं.
_ दुनिया में ये वस्तुएँ मन को इस तरह उत्तेजित करती हैं कि.. कुछ समय के लिए यह महसूस होता है कि.. उसे वह मिल गया है.. जो वह चाहता है.
_ संसार की वस्तुएँ मन को भीतर से तृप्त करती हुई प्रतीत होती हैं.
_ यह वैसा ही है, ..जैसे चोर-डकैत आपके साथ सहयोग कर रहे हों और बार-बार आपसे कह रहे हों कि वे आपके साथ हैं,
_ कि वे आपकी सेवा में हैं, लेकिन उनके पीछे की मंशा अलग है.
_ यह प्रत्येक व्यक्ति पर छोड़ दिया गया है कि.. वह कैसे खुश रह सकता है.
_ यदि आप दुखी हैं तो.. आपको उस कारण का पता लगाना चाहिए.. कि आप दुखी क्यों हैं.
_ हम हमेशा यही शिकायत करते रहते हैं कि दुनिया खराब है, लोग अच्छे नहीं हैं, सब कुछ अस्त-व्यस्त है और इस संसार में कुछ भी मूल्यवान नहीं है.
_ लेकिन आप भी उसी दुनिया का एक हिस्सा हैं,
_ इसलिए जब आप दुनिया के लोगों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करते हैं,
_ तो आप स्वचालित रूप से इस निर्णय में खुद को शामिल कर रहे हैं,
_ क्योंकि आप भी लोगों में से एक हैं.

सुविचार – तुम इस मन को राह दो – 1068

तुम इस जड़ को प्राण दो, तुम इस जड़ को धड़कन दो,

तुम इस जड़ को शब्द दो,
और ये तुमसे प्यार न करती हो, ये कैसे हो.
तुम इस मन को सुख दो, तुम इस मन को विश्वास दो,
तुम इस मन को राह दो,
ये तुम्हे प्यार न करता हो, ये कैसे हो.
तुम इस बुद्धि को समझ दो, तुम इस बुद्धि को ज्ञान दो,
तुम इस बुद्धि को कल्पनाएं दो,
ये तुम्हे प्यार न करती हो, ये कैसे हो.
बस इसी प्यार के सहारे ये जड़ मन बुद्धि जीवित है.
आपके ही तो सहारे हम इस मुश्किल राह पर चलने के लिए प्रेरित हैं.
इसीलिए तो आ जाते हैं हम आपके बुलाने पर.
तुम इस जड़ को प्राण दो, तुम इस जड़ को धड़कन दो,
मन में कुछ भर कर जीयंगे.., तो मन भर कर नहीं जी पाएंगे.!!
जब भीतर का मन स्थिर हो जाता है, तब बाहरी तूफान भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते.!!
जो हाथ में न हो, उसे मन से भी आज़ाद कर देना चाहिए..!!
अपने मन पर काबू रखना सीखो,
_ क्योंकि एक शांत मन बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना भी कर सकता है.!!
हर किसी को लगता है कि सब कुछ उसके मन का ही हो..

_ दुनिया उसी के हिसाब से चले..
_ लोग वैसा ही करें.. जैसा वह चाहता है और हालात उसके मुताबिक बनते जाएँ.
_ लेकिन सच यह है कि ऐसा कभी नहीं होता..
_ जिंदगी किसी एक इंसान की सोच पर नहीं चलती..
_ यहाँ सबकी इच्छाएँ टकराती हैं, सबकी उम्मीदें अलग होती हैं..
_ इसलिए हर बार मन का होना संभव नहीं होता और शायद यही जिंदगी की असली सच्चाई है.!!

सुविचार 1067

हर परिस्थिति में दो विकल्प हमारे सामने आते हैं. जो इन्सान उनमे से सही विकल्प चुनता है, उसका जीवन खुशहाल रहता है. खुश रहना, दुःखी रहना हमारे हाथों में है. बुरी घटना पर रोने से बेहतर है कि उससे सीख लेकर तुरन्त आगे बढ़ जाएँ. हमेशा बेहतर विकल्प चुनें.

सुविचार – रोजमर्रा की कुछ बातें – 1066

*1.* प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें. चाहे समय ना हो तो घर मे ही टहले , टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.

🌟 *2.* प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें.
🌟 *3.* पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.
🌟 *4.* 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें.
🌟 *5.* प्रतिदिन खूब पानी पियें.
🌟 *6.* प्रतिदिन कम से कम तीन बार ये सोचे की मैने आज कुछ गलत तो नही किया.
🌟 *7.* गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.
🌟 *8.* अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.
🌟 *9.* एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं.
🌟 *10.* एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.
🌟 *11.* दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है.
🌟 *12.* आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.
🌟 *13.* अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.
🌟 *14.* गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.
🌟 *15.* ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.
🌟 *16.* समय ! सब घाव भर देता है.
🌟 *17.* ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है.
🌟 *18.* प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें

सुविचार – कहां थे, कहां पहुँच गये – 1065

” कहां थे, कहां पहुँच गये “

*एक तौलिया से पूरा घर नहाता था।*

*दूध का नम्बर बारी-बारी आता था।*

*छोटा माँ के पास सो कर इठलाता था।*

*पिताजी से मार का डर सबको सताता था।*

*बुआ के आने से माहौल शान्त हो जाता था।*

*पूड़ी खीर से पूरा घर रविवार व् त्यौहार मनाता था।*

*बड़े भाई के कपड़े छोटे होने का इन्तजार रहता था।*

*स्कूल मे बड़े भाई की ताकत से छोटा रौब जमाता था।*

*बहन – भाई के प्यार का सबसे बड़ा नाता था।*

*धन का महत्व कभी कोई सोच भी न पाता था।*

*बड़े का बस्ता किताबें साईकिल कपड़े खिलोने पेन्सिल स्लेट स्टाईल चप्पल सब से छोटे का नाता था।*

*मामा – मामी नाना – नानी पर हक जताता था।*

*एक छोटी सी संदुक को अपनी जान से ज्यादा प्यारी तिजोरी बताता था।*

*~~ अब ~~*

तौलिया अलग हुआ, दूध अधिक हुआ,*

*माँ तरसने लगी, पिता जी डरने लगे,*

*बुआ से कट गये, खीर की जगह पिज्जा बर्गर मोमो आ गये,*

*कपड़े भी व्यक्तिगत हो गये, भाईयो से दूर हो गये,*

*बहन से प्रेम कम हो गया,*

*धन प्रमुख हो गया, अब सब नया चाहिये,*

*नाना आदि औपचारिक हो गये।*

*बटुऐ में नोट हो गये।*

*कई भाषायें तो सीखे मगर संस्कार भूल गये।*

*बहुत पाया मगर काफी कुछ खो गये।*

*रिश्तो के अर्थ बदल गये,*

*हम जीते तो लगते है*

*पर संवेदनहीन हो गये।*

*कृपया सोचें ,*

*कहां थे, कहां पहुँच गये।*

 

 

 

 

 

 

 

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