सुविचार 1102

दूसरों के दोष ढूंढ़ने में अपनी ताकत को खर्च मत करो अपितु अपने गुणो को निखारने में वक़्त बिताओ.

सुविचार 1101

हर इनसान के जीवन जीने का मकसद भले अलग- अलग हो, जीवन को लेकर नजरिया भले अलग- अलग हो, अपने मकसद में कामयाबी के सपने एक जैसे होते हैं. कोई अपने मकसद में असफल होना नहीं चाहता, लेकिन यह सच है कि हर किसी को हर मकसद में कामयाबी नहीं मिलती. कई बार ऐसा होता है, जब इनसान बार- बार की कोशिश के बाद भी असफल रहता है और हालात ऐसे बन जाते हैं कि वह घोर निराशा से घिर जाता है. खुद को असहाय महसूस करता है. यहां तक कि खुद को असफल व्यक्ति मान बैठता है. उसे कोई राह नहीं दिखती और वह कोई फैसला लेने से भी डरने लगता है. अवसाद की यह अवस्था इनसान को इतना कमजोर बना देती है कि वह यह मान बैठता है कि उस के जीवन में सफलता नहीं आ सकती, लेकिन यह सच नहीं है. असफलता से सफलता की ओर लौटना बिलकुल संभव है. इसके लिए आत्मविश्वास, प्रेरणा, प्रोत्साहन, मार्गदर्शन, सहयोग और कार्य- योजना की जरुरत है.

सुविचार – मैं छिपाना चाहता हूँ – 1100

मैं छिपाना चाहता हूँ खाली फटी जेब के छेद, उनमें उंगलियां डालकर, मुट्ठियां भर कर..

मैं छिपाना चाहता हूँ, घर से दफ्तर जाते _ दफ्तर से घर आते, वह एक बड़ी लंबी सी सूची _ जिसमें लिखा होता है _ दफ्तर जाते वक्त करना है क्या ? पर रोज मैं उस लंबी सूची के मुताबिक न कुछ कर पाता हूं _ न ला पाता हूं..

मैं छिपाना चाहता हूँ, कमीज की उघड़ी सिलाई, टूटे बटन, पेंट की तुरपाई, _ कभी इस कमीज को कभी उस पैर को बदल- बदल कर _ लेकिन आस्तीन से बाहर झांकती _ अंदर की धुलाई से लंबी हो गई बनियान की लटकती बाहें – दबे छुपे कह ही देती हैं _ बहुत कुछ..

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है.!

सुविचार 1099

अच्छी योजना बनाना बुद्धिमानी का काम है पर उस को ठीक से पूरा करना धैर्य और परिश्रम का.

सुविचार 1098

रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है. लेकिन एक अच्छे जूते के अन्दर एक भी कंकड़ हो तो एक अच्छी सड़क पर भी दो चार कदम चलना मुश्किल है. यानी बाहर की चुनौतियों से नहीं बल्कि हम अपनी अन्दर की कमजोरियों से हारते हैं.

सुविचार 1097

जीवन एक बहुमूल्य अवसर है, पर उसका मूल्य जीने वाले पर निर्भर करता है.
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