सुविचार 1146

“क्या जीवन कभी – कभी अनुचित नहीं लगता ? जो अच्छा करते हैं वे अच्छा कर रहे हैं,

लेकिन जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है उन्हें अनुमति नहीं है “

सुविचार 1145

अपनी गलती को स्वीकारना झाड़ू लगाने के सामान हैं, जो धरातल को चमकदार और साफ कर देती हैं.

सुविचार 1144

जो दूसरों को जीतता है वह मजबूत है और जो स्वयं को जीतता है वह शक्तिमान है.

सुविचार 1143

माचिस की तीली के सिर होता है पर दिमाग नहीं, इसलिए वह थोड़े से घर्षण से जल उठती है. हमारे पास सिर भी है और दिमाग भी, फिर भी हम छोटी- सी बात पर उत्तेजित क्यों हो जाते हैं ?

सुविचार 1142

गलती कोई भी कर सकता है, परंतु मूर्ख के अतिरिक्त कोई उस को जारी नहीं रखेगा.

सुविचार 1141

इंसान को नमक की तरह होना चाहिए….जो खाने में रहता है मगर दिखाई नहीं देता; और अगर ना हो तो उनकी बहुत कमी महसूस होती है.
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