सुविचार 1048 | Feb 3, 2016 | सुविचार खूब सावधानी से छिप कर किए जाने वाले अपराध का भी कोई न कोई साछी पैदा हो ही जाता है.
सुविचार 1047 | Feb 1, 2016 | सुविचार आप जैसेजैसे विकास की ओर बढ़ते हैं वैसेवैसे अपने मन के आलस को भगा कर तेजस्वी, उत्साही व सक्रिय होते जाते हैं. विकासशील व्यक्ति सदैव उद्यमी व उत्साही रहता है, स्वार्थहीनता उसे ऊर्जा देती रहती है. उस का मन शांत व बुद्धि प्रखर होती जाती है.
सुविचार – तीन चीज़ें – 1046 | Jan 31, 2016 | सुविचार →→→←←←←→→→← •√. तीन चीजों को कभी छोटी ना समझे – बिमारी, कर्जा और शत्रु। →→→←←←←→→→← •√. तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो – मन, काम और लोभ। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें निकलने पर वापिस नहीं आती – तीर कमान से, बात जुबान से और प्राण शरीर से। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें कमज़ोर बना देती है – बदचलनी, क्रोध और लालच। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें कोई चुरा नहीं सकता – अकल, चरित्र और हुनर। →→→←←←←→→→← •√. तीन व्यक्ति वक़्त पर पहचाने जाते हैं – स्त्री, भाई और दोस्त। →→→←←←←→→→← •√. तीनों व्यक्ति का सम्मान करो – माता, पिता और गुरु। →→→←←←←→→→← •√. तीनों व्यक्ति पर सदा दया करो – बालक, भूखे और पागल। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़े कभी नहीं भूलनी चाहिए – कर्ज़, मर्ज़ और फर्ज़। →→→←←←←→→→← •√. तीन बातें चरित्र को गिरा देती हैं – चोरी, निंदा और झूठ। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें हमेशा दिल में रखनी चाहिए – नम्रता, दया और माफ़ी। →→→←←←←→→→← •√. तीन बातें कभी मत भूलें – उपकार, उपदेश और उदारता। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ों पर कब्ज़ा करो – ज़बान, आदत और गुस्सा। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ों से दूर भागो – आलस्य, खुशामद और बकवास। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ों के लिए मर मिटो – धेर्य, देश और मित्र। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें इंसान की अपनी होती हैं – रूप, भाग्य और स्वभाव। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीजों पर अभिमान मत करो – धन, ताकत और सुन्दरता। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें अगर चली गयी तो वापस नहीं आती – समय, शब्द और अवसर। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें इन्सान कभी नहीं खो सकता – शान्ति, आशा और ईमानदारी। →→→←←←←→→→← •√. तीन चीज़ें जो सबसे अमूल्य है – प्यार, आत्मविश्वास और सच्चा मित्र।
सुविचार 1045 | Jan 30, 2016 | सुविचार उदार आदमी जब तक जीता है, आनंद से जीता है और तंगदिल जिंदगीभर दुखी रहता है.
सुविचार 1044 | Jan 29, 2016 | सुविचार किताबी इल्म डिगरियां देता है जबकि दुनियाबी इल्म इंसानी सोच की महीन सी झीनीझीनी चादर बुनना भी सिखा सकता है.
सुविचार – U N C L E – 1043 | Jan 28, 2016 | सुविचार U N C L E उम्र पचास पार है लेकिन शक्ल हमारी तीस के जैसी मुझको uncle कहने वाले, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी बेटे के कॉलेज गया तो, टीचर देख मुझे मुस्कुराई बोली क्या मेनटेइंड हो मिस्टर, पापा हो, पर लगते हो भाई क्या बतलाऊँ उसने फिर, बातें की मुझ से कैसी कैसी मुझको uncle कहने वालों, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी पडोसन बोली, सेकंड हैंड हो, लेकिन फ़्रेश के भाव बिकोगे बस थोड़ी सी दाढ़ी बढ़ा लो, बिलकुल हीरो जैसे दिखोगे मुझको uncle कहने वालों, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी बीवी सोच रही है शौहर, मेरा कितना अच्छा है जी पढ़ती नहीं गुलज़ार साहेब को, दिल तो आख़िर बच्चा है जी नीयत मेरी साफ़ है यारों नही हरकतें ऐसी वैसी मुझको uncle कहने वालों, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी कितने जंग लड़े और जीते इन गुज़रे सालों में हैं दो-एक झुर्रियाँ गालों में हैं, और सफ़ेदी बालों में है इरादे मगर मज़बूत हैं अब भी, उमंग भी सॉलिड पहले जैसी मुझको uncle कहने वालों, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी जीने का जज़्बा क़ायम हो तो, उम्र की गिनती फिर फ़िज़ूल है अपने शौक़ को ज़िंदा रखो, जीने का बस यही उसूल है ज़िंदादिली का नाम है जीवन, परिस्थितियाँ हों चाहे जैसी मुझको uncle कहने वालों, धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी Dedicated to all 50+ friends