सुविचार 1086

आप कितने ही व्यस्त क्यों न रहते हों, अपने जानकारों और दोस्तों से संपर्क न टूटने दें. लोगों से मेलमिलाप रखने से कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता रहता है.

सुविचार 1085

जीवन में कठिनाइयाँ हमे बर्बाद करने नहीं आती है, बल्कि यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करती है. …… कठिनाइयों को यह जान लेने दो की आप उससे भी ज्यादा कठिन हो.

सुविचार 1084

दिखावे पर बिलकुल नहीं जाएँ , सोचें कि आप ऐसा क्या कर सकते हैं , जिस से आपके ज्ञान में वृद्धि हो.

सुविचार 1083

जब तक आप अपने दिमाग को रोजाना नयी – नयी जानकारी नहीं देंगे , उसे अप.डेट नहीं करंगे – तब तक वह आपको बेहतर रिजल्ट नहीं दे पायेगा.

सुविचार – *छोटा सा मोहल्ला मेरा पूरा बिग बाजार था.* – 1081

*छोटा सा मोहल्ला मेरा,* *पूरा बिग बाजार था !*

*एक नाई, एक मोची, एक सुनार,* *एक कल्लू लुहार था.*
*छोटे छोटे घर थे पर,* *हर आदमी बङा दिलदार था.*
*कहीं भी रोटी खा लेते थे,* *हर घर मे भोजऩ तैयार था.*
*बड़ी, गट्टे की सब्जी मजे से खाते थे,* *जिसके आगे शाही पनीर बेकार था.*
*ना कोई मैगी ना पिज़्ज़ा…* *झटपट पापड़, भुजिया, आचार, या फिर दलिया तैयार था.*
*नीम की निम्बोली और बेरिया सदाबहार था.*
*रसोई के परात या घड़े को बजा लेते,* *नीटू पूरा संगीतकार था.*
*मुल्तानी माटी लगा पोखर में नहा लेते,* *साबुन और स्विमिंग पूल सब बेकार था.*
*और फिर कबड्डी खेल लेते,* *हमें कहाँ क्रिकेट का खुमार था.*
*अम्मा से कहानी सुन लेते,* *कहाँ टेलीविज़न और अखबार था.*
*भाई-भाई को देख के खुश था,* *सभी लोगों मे बहुत प्यार था.*
*छोटा सा मोहल्ला मेरा पूरा बिग बाजार था.*
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