सुविचार 962

परिस्थितियों का रोना रो कर, दूसरों को कोस कर हम खुद को सांत्वना भले ही दे दें, पर इस से हासिल कुछ नहीं होता, और तो और जो सम्भावनाएँ मौजूद होती हैं, हम उन का भी पूरा लाभ नहीं उठा पाते. 

सुविचार 961

माल व जर की हिफाजत से ज्यादा मुश्किल है, जबान को हिफाजत में रखना.

सुविचार 960

सदैव नम्र हो कर चलें. बड़ी घास जल जाती है और दूब, जो नीची होती है, बनी रहती है.

सुविचार 959

मूडी [Moody] होना अथवा अपनी इच्छा से जीना अच्छी बात है,

_ किंतु किसी भी आदत की अति अच्छी नहीं होती.
_ यदि आपके क्रियाकलापों से किसी व्यक्ति या आप के अपने को कोई फर्क नहीं पड़ रहा तब आप को पूरा हक बनता है कि खुद के हिसाब से जिएं, अपनी मरजी के अनुसार व्यवहार करें.
_ परंतु ऐसा यदि नहीं है तो इंसानियत के नाते दूसरों के बारे में सोच कर उन की इच्छाओं व भावनाओं की कद्र करें, उन के लिए भी सोचें.!!

सुविचार 958

साहस खतरे की ओर से आँखें बंद करने में नहीं, उसे देख कर उस का मुकाबला करने में है.

सुविचार 957

हमें एक बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि सुख और दुख सिर्फ आदतें हैं. दुखी रहने की आदत तो हमने डाल रखी है, सुखी रहने की आदत भी डाल सकते हैं. इसे स्वभाव बनाइए और आदत में शामिल कर लीजिए. यह गलत सोच है कि इतना धन, पद या प्रतिष्ठा मिल जाए तो आनंदित हो जाएंगे. दरअसल, यह एक शर्त है. जिसने भी अपने आनंद पर शर्त लगाई वह आज तक आनंदित नहीं हो सका. अगर आपने बेशर्त आनंदित जीवन जीने का अभ्यास शुरू कर दिया तो ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां आपकी ओर आकर्षित होने लगेंगी.
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