सुविचार 964

खरीदारी करने से पहले अच्छे से विचार कर लें कि क्या वाकई आपको उस चीज की जरुरत है या किसी मित्र व रिश्तेदार को देख कर खरीद रहे हैं या फिर उन्हें नीचा दिखाने के लिए तो ऎसा नहीं कर रहे हैं. इस बात का भी ध्यान रखें कि इस खरीदारी से घर का बजट तो नहीं गड़बड़ाजायेगा, जिसकी कीमत परिवार को कष्ट उठाकर चुकानी पड़े, यदि जवाब ईमानदारी से आपके परिवार के पछ में जाता है तो आगे बढ़ें वरना रुक जाएँ .

सुविचार 963

जो कम बोलता है, जो अच्छी बातें करता है और प्यार से बोलता है, उसे हमेशा सम्मान मिलता है.

 

सुविचार 962

परिस्थितियों का रोना रो कर, दूसरों को कोस कर हम खुद को सांत्वना भले ही दे दें, पर इस से हासिल कुछ नहीं होता, और तो और जो सम्भावनाएँ मौजूद होती हैं, हम उन का भी पूरा लाभ नहीं उठा पाते. 

सुविचार 961

माल व जर की हिफाजत से ज्यादा मुश्किल है, जबान को हिफाजत में रखना.

सुविचार 960

सदैव नम्र हो कर चलें. बड़ी घास जल जाती है और दूब, जो नीची होती है, बनी रहती है.

सुविचार 959

मूडी [Moody] होना अथवा अपनी इच्छा से जीना अच्छी बात है,

_ किंतु किसी भी आदत की अति अच्छी नहीं होती.
_ यदि आपके क्रियाकलापों से किसी व्यक्ति या आप के अपने को कोई फर्क नहीं पड़ रहा तब आप को पूरा हक बनता है कि खुद के हिसाब से जिएं, अपनी मरजी के अनुसार व्यवहार करें.
_ परंतु ऐसा यदि नहीं है तो इंसानियत के नाते दूसरों के बारे में सोच कर उन की इच्छाओं व भावनाओं की कद्र करें, उन के लिए भी सोचें.!!
error: Content is protected