समय के साथ स्वयं को ढालने में यदि हम सफल हो जाते हैं तो हम हर परिस्थिति को आसानी से स्वीकार कर उसका सामना कर सकते हैं. वहीँ इसके ठीक विपरीत यदि हम स्वयं को समयानुसार नहीं ढालते, तो हम अपने विकास के द्वार को खुद बंद कर देते हैं.
शारीरिक स्थिति एवं मानसिक स्थिति एक दूसरे पर आश्रित है. यदि एक ठीक ना हो तो वह दूसरे पर भी बहुत गहरा प्रभाव डालती है. इसलिए दोनों का अच्छा होना एवं स्वस्थ होना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इनका संतुलन अनिवार्य है. हमारे लछ्य की पूर्ति भी हमारे शरीर की दशा एवं हमारी मनःस्थिति पर निर्भर करती है.
एक इन्सान अगर चाहे तो अपनी बातों से सामने वाले की ज़िन्दगी सँवार सकता है, चाहे तो बिगाड़ सकता है. – – – – – क्योंकि आपके शब्द ही हैं, जो एक तरफ सामने वाले को सकारात्मक ऊर्जा दे सकते हैं, तो दूसरी तरफ उसे नकारात्मकता की खाई में ढकेल सकते हैं.
यों तो जिंदगी जैसे तैसे सभी की गुजर जाती है, पर असली जीना तो उन का है जो एक उद्देश्य के लिए जीते हैं. दरअसल कुछ चाहने और फिर उसे प्राप्त करने की कोशिश में ही आदमी जिंदगी का असली मजा ले सकता है.