सुविचार 843

एक ही चोट कह देती है, हीरा है कि काँच है ..

चेहरा खुद चुगली कर देता है, झूठ है कि साँच है ..

धूल उछाले कोई कितनी ही सूरज की अरुणाई पर,

किँतु समय खुद बतला देता है, नहीँ साँच को आँच है …..

सुविचार 842

बुरे वह लोग नहीं, जो कहते हैं कि आप अपने सपनों को हासिल नहीं कर सकते, बल्कि बुरी आपकी वह सोच है जो इस बात को सच मानने लगती है.

सुविचार 841

प्रकृति का तमाशा भी खूब है. सृजन में समय लगता है, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो जाता है.

सुविचार 839

गरीबों का मज़ाक मत उड़ाओ, क्युँकि गरीब होने में वक्त नहीं लगता.

सुविचार 838

बहुत कम लोगों में छमता का अभाव होता है. लेकिन वे असफल इसलिए होते हैं, क्योंकि वे अपनी छमता का उपयोग नहीं करते.

 

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