सुविचार 809

भीतर क्षमा हो, तो क्षमा निकलेगी. भीतर क्रोध हो, तो क्रोध निकलेगा. इस बात को एक मौलिक सूत्र की तरह अपने हृदय में लिखकर रख छोड़ें कि जो आपके भीतर है, वही निकलेगा. परिस्थितियां चाहे कुछ भी हों. इसलिए जब भी कुछ आपके बाहर निकले, तो दूसरे को दोषी मत ठहराना. वह आपकी ही संपदा है, जिसको आप अपने भीतर छिपाए थे.

सुविचार 807

कागज़ की नाव पानी में बहुत देर तक नहीं चल सकती. इसी तरह धोखा देने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन उसकी पोल खुल ही जाती है.
error: Content is protected