सुविचार 882

अपनी मस्ती में गुनगुनाता वही है, जो अन्दर से शान्त है, संतुष्ट है, विचारों से रिक्त है, सन्तुलित है, मर्यादित है. 

सुविचार 881

जिस मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार आप को है, उस में भी रायमशविरा लेने में कोई हर्ज नहीं है.

सुविचार 880

जिस दिन अपनी तरफ दृष्टि उठ गई, उस दिन संसार में हर वस्तु में सुख दिखाई देगा और लगेगा कि हर कोई मेरा भला चाहता है. बुरा करने वाला भी शायद किसी न किसी रूप में भला करके जाएगा. 

सुविचार 879

लोगों में बुराइयाँ नहीं, बल्कि अच्छाइयाँ खोजें. इस तरह आप सभी से प्यार करना सीखेंगे. आप सम्मान देंगे और बदले में सम्मान पाएंगे. 

सुविचार 878

प्रसन्न रहने के दो ही उपाय हैं- आवश्यकताएँ कम करें और परिस्थितियों से तालमेल बिठाएँ.
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