सुविचार 4857
जो दो पल की खुशी आपको आने वाले कल में अत्यंत दुखी करने वाली हो,
उसे आज ही जहर की तरह त्याग देना ही उचित है.
उसे आज ही जहर की तरह त्याग देना ही उचित है.
अन्यथा उसे न करने के हजार बहाने हैं.
मेहनत पे मेहनत करो तो तक़दीर बन जाती है.
जिस तरह इंसान साँस छोड़ने में आनाकानी नहीं करता क्योंकि वह जानता है, एक साँस छोड़ने के बाद अगली साँस खुद-ब-खुद आएगी.
उसी तरह जीवन में भी चीज़ों को फ्री फ्लों में आने-जाने दें, उनसे चिपकाव न रखें.