समय के साथ स्वयं को ढालने में यदि हम सफल हो जाते हैं तो हम हर परिस्थिति को आसानी से स्वीकार कर उसका सामना कर सकते हैं. वहीँ इसके ठीक विपरीत यदि हम स्वयं को समयानुसार नहीं ढालते, तो हम अपने विकास के द्वार को खुद बंद कर देते हैं.
शारीरिक स्थिति एवं मानसिक स्थिति एक दूसरे पर आश्रित है. यदि एक ठीक ना हो तो वह दूसरे पर भी बहुत गहरा प्रभाव डालती है. इसलिए दोनों का अच्छा होना एवं स्वस्थ होना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इनका संतुलन अनिवार्य है. हमारे लछ्य की पूर्ति भी हमारे शरीर की दशा एवं हमारी मनःस्थिति पर निर्भर करती है.