सुविचार 611

सफलता और महानता किसी की बपौती नहीं है. इन्हें तो वे ही प्राप्त करते हैं, जो प्रार्थना के अनुरूप पुरुषार्थ, प्रेरणा के अनुकूल परिश्रम करते हैं.

सुविचार 610

पूरी ज़िन्दगी एक जोख़िम है और सामान्यतः इसमें आगे वही निकल पाता है, जो अपने कर्म के साथ जोख़िम उठाने के लिए तत्पर रहता है.

सुविचार 609

हार के बाद जीतने की इच्छाशक्ति, गिरने के बाद उठ खड़े होने की मानसिकता और सबसे बड़ी बात, विपरीत परिस्थितियों में बिना धीरज खोए, आगे बढ़ने की चाहत होनी चाहिए.

सुविचार 608

अपनी जड़ें मजबूत करो, ताकि आपके जीवन में फूल खिलें. फूल खिलेंगे तो सुगन्ध दूसरों को मिलेगी ही मिलेगी.

_ अगर आपकी अपनी ही जड़ें मजबूत नहीं हैं तो आप इस भ्रान्ति में मत रहना कि आप किसी को सुगन्ध देने में कभी भी समर्थ हो सकते हो.

लोगों ने अनेक भ्रांतियाँ पाली हुई हैं.

_ पैसे वाले आदमी को अक्लमंद समझते हैं, गोरी त्वचा वाले को सुन्दर समझते हैं, मीठा बोलने वाले को साफ़ दिल का समझते हैं, हर वक़्त मुस्कुराते रहने वाले को लोग सुखी समझते हैं, भाई लोगों, भ्रम में मत रहो, ज़्यादातर इससे उल्टा होता है.!!

सुविचार 607

इस बात का प्रयास करें कि आप स्वयं अपने भीतर भी वही व्यक्ति हों, जो आप दूसरों के समछ पेश आते हैं.

सुविचार 606

आपको देखना होगा कि आपके किसी भी कृत्य से आपसे जुड़े किसी भी व्यक्ति अथवा प्राणी को कष्ट न पहुँचे.
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