सुविचार 597

मनुष्य जिस तरह की बातें सोचने लगता है, उसी तरह की उसकी विचार धारा बन जाती है और जिस तरह की विचार धारा बन जाती है, उसी तरह का वह जीवन जीने लगता है.

सुविचार 596

कठिनाइयां सब पर आती हैं. बुद्धिमान उसे हंस कर और मूर्ख उन्हें रो कर काटते हैं.

सुविचार 595

जीवन का सौन्दर्य मर्यादा के कारण है, अमर्यादित जीवन सौन्दर्यहीन हो जाता है.

सुविचार 594

मैं तो वक़्त से हार कर सर झुकाये खड़ा था,

_ सामने खड़े लोग खुद को बादशाह समझने लगे..

सुविचार 593

अपनी निर्णयात्मक शक्ति को मजबूत बनाने का एक ही तरीका है — उस से अधिक से अधिक काम लेना.
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