सुविचार 584

मनुष्य का जीवन एक नदी की भाँति है, जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है.

सुविचार 583

मनुष्य में ही जीवन शक्ति का सर्वोत्तम रूप है. जड़ वस्तु में जो शक्ति अच्छी है, बेअख्तियार है. जंतुओं में जो शक्ति प्रवृत्ति के आवेश से परिचालित होती है, मनुष्य में वही शक्ति मन, बुद्धि और ह्रदय की अधिकारिणी हुई है.

सुविचार 582

साहित्यकार एक दीपक के समान है, जो जल कर केवल दूसरों को ही प्रकाश प्रदान करता है. 

सुविचार 580

आशा नहीं है. इस में मनोरथ का जल भरा हुआ है और तृष्णा की अनंत तरंगें लहरें लेती है.
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