सुविचार 369

कोई किसी का मित्र है न शत्रु, केवल व्यवहार से मित्र और शत्रु होते हैं.

सुविचार 368

उदारता जीवन का आंतरिक भाग है. आप जो कुछ भी करते हैं, उस में हमेशा उदार रहें. दूसरों के गुणों को देखें, मीठे शब्द बोलें और बोलने से अधिक सुनने की आदत डालें. जिन्हें जरुरत है, उन की सहायता करें. अपने पैसों, सामान, समय, किताब या और भी दूसरे रास्तों से उन की सहायता करें. अपना समय किसी अच्छे इनसान को दें, ताकि इसका फायदा दूसरे लोगों को भी हो सके. हमेशा दूसरों का ध्यान रखिए और अपने पास जो कुछ भी है, उसे दूसरों के साथ बांटिए.

सुविचार 367

आम आदमी जिस काम को मुश्किल से कर पाए, उसे आसानी से कर लेने वाला योग्य है और योग्य आदमी जिस काम को असम्भव कह दे, उसे करने वाला प्रतिभाशाली है.

सुविचार 366

 दूब की तरह छोटे बन कर रहो, जब घास-पात जल जाते हैं तब भी दूब जस की तस बनी रहती है.
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