सुविचार 457

सोचने वाली बात है कि हम दूसरों के साथ जो बुरा व्यवहार करते हैं, लेकिन अगर वैसा ही व्यवहार कोई हमारे साथ करे, तो हम आगबबूला हो उठते हैं, ऎसा क्यों ? जब भी आप किसी के साथ कोई बुरा बरताव करें, दो मिनट रुक कर खुद से पूछें कि, अगर कोई मेरे साथ ऐसा बरताव करे, तो मुझे कैसा लगेगा. 
अपने नेक इरादों को जाहिर करने वाले शब्दों में चिड़चिड़ाहट व गुस्से को शामिल न होने दें. हर बात को दो तरीके से समझाया जा सकता है, एक चिल्ला कर और दूसरा शान्त भाव से. चिल्लायेंगे तो सामने वाला आपकी बात कभी नहीं समझेगा.

सुविचार 456

अपनी भावनाओं और मूड पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें. बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा न करें, न ही बहुत दुखी या उदास रहें.

समाज में भी अपने व्यवहार और भावनाओं में संतुलन बनाए रखें.

सुविचार 455

ज़िंदगी में सभी को सब कुछ नहीं मिलता.

जो नहीं मिला उसकी आस में रोने की बजाय, जो मिला है उसकी कद्र करें.

सुविचार 454

आप को विरासत में क्या मिला, अब यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह कि आप भावी पीढ़ी को कौन से मूल्य एवं संस्कार दे कर जाएँगे.

सुविचार 453

इंसान बड़ी अजीब फितरत का मालिक है,

ये मरे हुवे को रोता है और जिन्दों को रुलाता है.

सुविचार 452

एक मिनट में ज़िन्दगी नहीं बदलती, पर एक मिनट सोच कर लिया हुआ फैसला पूरी ज़िन्दगी बदल देता है.
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