सुविचार 336

लोगों के बारे में एक ही धारणा कायम न कर लें. न ही सबको एक ही तराज़ू में तौलें. हर परिस्थिति अलग होती है और अलग-अलग परिस्थिति में लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं. मन में एक ही बात बैठाकर उसी नज़रिए को सही न मानें.

सुविचार – शर्म – 335

शर्म एक ऐसा भाव है, जो बताता है कि, हमारे जीवन में कहीं कुछ गड़बड़ है. इस के कारण हम दूसरों से कटने लगते हैं और आत्मसम्मान की कमी का अनुभव करते हैं.

सुविचार 334

नकारात्मक सोच में जीने वाला एक व्यक्ति अनेक उत्साही व्यक्तियों को भ्रमित कर देता है अतः कभी भी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति की संगति न करें.

सुविचार 332

यदि हम अंदर से खुश होते हैं, तो हमारा मन स्थिर रहता है और जीवन में संतुलन आता है.

सुविचार 331

जैसे गूंगे के संकेत को गूंगा ही आसानी से पहचान पाता है. उसी प्रकार ज्ञानी के सुख को वही जान पाता है, जो खुद भी ज्ञानी होता है.
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