व्यक्ति के जीवन में जब अज्ञान बढ़ता है, उसे समझ नहीं आता कि मैं क्या करूँ, क्या न करूँ, कहाँ जाऊँ, कहाँ न जाऊँ, मुझे क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, किस चीज की लालसा रखनी चाहिए और किस चीज से दूर रहना चाहिए — अज्ञान में आदमी को कोई समझ नहीं रहती.