लोगों को आप हमेशा खुश नहीं रख सकते हैं.
_ आप हमेशा उनके मुताबिक नहीं चल सकते.
_ यदि आप ऎसा करने की कोशिश करेंगे, तो कहीं न कहीं खुद के साथ अन्याय करेंगे.
_ सोचिए, हम उन लोगों के नाराज होने से क्यों डरें, जिनकी राय पल भर में हमारे प्रति बदल जाती है.
_ जो कल हमें विनम्र, प्यारा, अच्छा इन्सान कह रहे थे, वह हमें अचानक अभिमानी, गुस्सैल, अहंकारी कहने लगें.
_ आप केवल उन्हें ही अपना मानें, जो आपके ‘ ना ‘ कहने के बावजूद भी आपसे प्यार करे.
_ आपकी ‘ना’ कहने की बजह को समझे.
_ इसलिए दूसरों से सम्मान पाने के लिए अपनी खुशियों का गला न घोटें.!!