काम करने के लिए छमता एक मानसिक स्थिति है, हम कितना ज्यादा काम कर सकते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपनी छमताओं के बारे में क्या सोचते हैं, जब आपको सचमुच विश्वास हो जाता है कि आप ज्यादा काम कर सकते हैं, तो आपका दिमाग रचनात्मक तरीके से सोचता है.
यदि आप रोज तारीफ़ के काबिल करने योग्य कार्यों को ढूँढ निकालते हैं तो ऐसे कार्यों को और ज्यादा ढूँढ़ने की आदत विकसित होने लगती है.
सोचने वाली बात है कि हम दूसरों के साथ जो बुरा व्यवहार करते हैं, लेकिन अगर वैसा ही व्यवहार कोई हमारे साथ करे, तो हम आगबबूला हो उठते हैं, ऎसा क्यों ? जब भी आप किसी के साथ कोई बुरा बरताव करें, दो मिनट रुक कर खुद से पूछें कि, अगर कोई मेरे साथ ऐसा बरताव करे, तो मुझे कैसा लगेगा.
अपने नेक इरादों को जाहिर करने वाले शब्दों में चिड़चिड़ाहट व गुस्से को शामिल न होने दें. हर बात को दो तरीके से समझाया जा सकता है, एक चिल्ला कर और दूसरा शान्त भाव से. चिल्लायेंगे तो सामने वाला आपकी बात कभी नहीं समझेगा.