सुविचार 368

उदारता जीवन का आंतरिक भाग है. आप जो कुछ भी करते हैं, उस में हमेशा उदार रहें. दूसरों के गुणों को देखें, मीठे शब्द बोलें और बोलने से अधिक सुनने की आदत डालें. जिन्हें जरुरत है, उन की सहायता करें. अपने पैसों, सामान, समय, किताब या और भी दूसरे रास्तों से उन की सहायता करें. अपना समय किसी अच्छे इनसान को दें, ताकि इसका फायदा दूसरे लोगों को भी हो सके. हमेशा दूसरों का ध्यान रखिए और अपने पास जो कुछ भी है, उसे दूसरों के साथ बांटिए.

सुविचार 367

आम आदमी जिस काम को मुश्किल से कर पाए, उसे आसानी से कर लेने वाला योग्य है और योग्य आदमी जिस काम को असम्भव कह दे, उसे करने वाला प्रतिभाशाली है.

सुविचार 366

 दूब की तरह छोटे बन कर रहो, जब घास-पात जल जाते हैं तब भी दूब जस की तस बनी रहती है.

सुविचार 365

सभी लोगों के स्वभाव की ही परीछा की जाती है, गुणों की नहीं. सब गुणों की अपेछा स्वभाव ही सिर पर चढ़ा रहता है.

सुविचार 364

जिस तरह पानी अपना स्तर ढूंढ लेता है, आप को भी अपने स्तर व गरिमा के अनुसार औरों से संबंध रखना चाहिए.

सुविचार 363

अगर आपकी जिन्दगी में कोई परेशानी है, तो उसे मन में दबा कर न रखें. यह न सोचें कि किसी को आपकी तकलीफों का पता नहीं चलना चाहिए और सबको लगना चाहिए कि सब कुछ नार्मल है. आप यह जताने में बिल्कुल भी देर न करें कि आपको मदद की जरुरत है. एक दूसरे के सहयोग से ही परेशानियां दूर होती हैं.
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