सुविचार 276

दूध कितना भी शुद्ध हो, नींबू की एक बूंद ही उसे खराब करने के लिए काफी है. ऐसे ही निराशा का विचार नींबू का काम करता है, निराशा से आप अपनी शक्ति खो बैठते हैं. आपका विचार रूपी लावण्य, माधुर्य को छीन सकता है. विचार जीने के ढंग को बदल सकते हैं. संसार सब जगह है, स्थान बदलने से बात नहीं बनेगी, अंदर बदलाव आना चाहिए. अपने- आपको नहीं बदला तो घर, स्थान आदि बदलने से कुछ होने वाला नहीं. अपने को बदलने के लिए दिशा बदलनी होगी, दिशा को बदलने से दशा बदलेगी.

सुविचार 275

छोटी- छोटी वस्तुएं एकत्र करने से बड़े काम भी हो सकते हैं.

घास से बनायी हुई डोरी से भी हाथी बांधा जा सकता है.

सुविचार – हम सभ्य हो गए – 274

हम सभ्य हो गए.

_ अब हम चीख-चीख कर नहीं लड़ते
_ हल्की आवाज में भी नहीं लड़ते
_ मौन होकर अपनी अरुचि दर्शाते हैं.
_ अब हम ठहाके नहीं लगाते
_ हा हा, ही ही, हू हू नहीं करते
_ अब हम स्मित मुस्कान मुस्काते हैं.
_ अब हम किसी से शिकायत नहीं करते
_ पहले शिकायत करना अपनापन लगता था
_ अब शिकायत करने से
_ आदमी छोटा बनता है
_ हम छोटे क्यों बनें ?
_ शब्दों का इस्तेमाल कम हो गया है
_ खामोशी की मनहूसियत छाई रहती है.
_ वो चहकने का काल पुराना हुआ
_ अब हम आधुनिक हैं
_ खामोश, अकेलेपन को झेलते हुए.
_ लड़ते थे तो वातावरण में जान थी
_ शोरगुल की एक अपनी शान थी.
_ सभ्य क्या हुए
_ चहचहाने के पल अलभ्य हो गए.
– Manika Mohini

सुविचार – “हम जैसे हैं वैसे ही अच्छे हैं” – 273

“हम जैसे हैं वैसे ही अच्छे हैं”

_ अगर दुनिया हमें हमारी सारी खूबियों और कमियों के साथ स्वीकार नहीं कर सकती, तो हम दुनिया के लिए अपना व्यवहार नहीं बदलेंगे..
_ और जब आप किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं, भले ही आपको उससे बात करने या संपर्क में रहने का समय न मिले, पर वे इसे कभी नहीं भूलेंगे.!!

सुविचार 272

पानी को कसकर पकड़ोगे तो वो हाथ से छूट जायेगा,

उसे बहने दो वो अपना रास्ता खुद बना लेगा,

कभी कभी जब परिस्थितियां समझ में ना आये तो,

जो कुछ जीवन में घटित हो रहा है,

उसे शांत भाव व तटस्थ होकर बस देखना चाहिए,

समय आने पर जीवन अपना मार्ग खुद बना लेगा.

 

 

 

 

सुविचार 271

इस जीवन में यदि कसी को छमा करना है तो शीघ्र ही कर दो. धीरे- धीरे छमा करना, छमा न करने के बराबर ही है.
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