सुविचार 356

जीवन में सफलता के लिए लछ्य निर्धारण बहुत जरुरी है. लछ्य निर्धारित होने के बाद उसके अनुरूप कार्य करने की अनिवार्यता होती है. पूरी प्रतिबद्घता, अनुशासन, संयम, लगातार परिश्रम करने की लगन यदि एक साथ मिल जाए तो हर मंजिल आसान हो जाती है.

सुविचार 355

जब आप ईमानदारी से कुछ चाहतें हैं, तो पूरी कायनात उसको हासिल करने में आपकी मदद करती है.

सुविचार 354

जिन्दगी अच्छे और बुरे पलों से मिल कर बनी है, दोनों का अपना मज़ा है. एक के बिना दूसरा अधूरा है, यही वजह है कि न तो कभी खुशी को सिर पर बिठाओ, न ग़म को दिल से लगाओ.

सुविचार- आपकी ज़िन्दगी सॅवारने के लिए आपको खुद लगना होगा.- 352

आपकी ज़िन्दगी सॅवारने के लिए आपको खुद लगना होगा.
गमले में उगे हुए लोग..और बातें करते हैं बरगद की.!!

“किसी के गमले को देखकर उसके बरगद बनने की संभावना को कम मत आँकिए.
_ हर बरगद कभी एक छोटे से पात्र में ही शुरू हुआ था”
तुम्हारी खामोशियों में एक शोर है. _ मैं तुम्हें सुनता हूं और सुनकर खामोश हो जाता हूं.

_ पर अफसोस कि आसपास उन खामोशियों को सुनने वाला कोई नहीं होता.

_ हमारे आसपास की चीजें तेजी से मर और खत्म हो रही हैं.
_ हवाओं में एक चीख है, जो किसी को सुनाई नहीं देती.
_ उदासी कह रही है कि कोई छूए और हमारा मौन टूटने का नाम ही नहीं ले रहा है.
_ हमें समझना होगा कि यह कोई दर्शन नहीं जीवन है.
_ हमें अपने आसपास, पास पड़ोस, अपनी और दूसरों की छोटी- बड़ी जरूरतों को जाहिर करना और ख्याल रखना चाहिए.
_ हमें समझना आना चाहिए कि हम इंसानों को सिर्फ दर्शन नहीं जीवन की आश्यकता है ; अपनेपन, प्रेम और स्पर्श की जरूरत है.
…और इतने भर से ही इन्सान जी उठता है ; पर इतना भी हर किसी के हिस्से में नहीं..
_ इसी छोटी सी हंसती खिलखिलाती दुनिया में एक बहुत बड़ी दुनिया उदास है,
पर उन उदासियों तक पहुंचने वाला कोई नहीं है.
_ इसी हंसती खिलखिलाती दुनिया में एक बहुत बड़ी दुनिया बेचैन है,
पर उनकी बेचैनियों तक हमारे हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं.
_ कुछ छूट रहा है, कुछ अलग हो रहा है, कुछ था जो अब नहीं है..
_ पर इसका मतलब यह नहीं कि हर कोई बेचैनियों का दामन थाम ले और उदसियों का हाथ पकड़ अपने ही घर के किसी अंधेरे कोने को तलाश बैठ जाए.
_ तुम्हें पता है ? जब आसपास कुछ भी नहीं होता तो बहुत कुछ होता है.
_ एक खिड़की, एक झरोखा, एक दरवाजा..!!
_ मुझे चाहे कितना भी दुख क्यों हो, _ मैं हमेशा खिड़की, दरवाजे या फिर खुली हुई जगह पर बैठता हूं.
_ तुम्हें पता है ? हवाओं में एक स्पर्श होता है, अपनी पसंद की जगहों में भी एक सम्मोहन और अपनापन होता है.
_ और यह छोटा सा प्रयास मेरे चेहरे पर मुस्कराहट लाता है.
_ देखा जाए तो मुस्कराहट इस दुनिया की सबसे बड़ी इनायत है.
_ ब्रह्माण्ड की सारी खूबसूरत चीजें आपको हंसते हुए मिलेंगी..
_ जैसे की फूल, जैसे की तितलियां, जैसे की परिंदे, जैसे की मछलियां..
_ जैसे की यह धरती, आकाश, पहाड़ और नदियां..
_ सच कहूं तो पूरी की पूरी जिन्दगी पहाड़ की तरह है..
.. अगला मोड़ आपको किधर और कहां लेकर जाएगा _किसी को भी नहीं पता..
_बावजूद इसके पहाड़ जिन्दगी की तरह खूबसूरत हैं, इनमें बड़े से बड़े दुख को सह लेने की शक्ति और सकून है.
_ अच्छा होगा कि अगर खिड़कियों, रौशनदानों और दरवाजों से सांस लेने जितनी पर्याप्त हवा नहीं आ पा रही हो तो घर में घुटने की बजाय पहाड़ चुनिए..
_ यह पहाड़ हमें खुदको भूल जाने और जीने का हजारों अवसर देते हैं..
_ संसाधन कम है, पर जिन्दगी ज्यादा..
_ जिन्दगी उन भौतिक चीजों से हरगिज नहीं बनती _ जिन्हें हम सुख और समृद्धि का कारण समझते हैं..
_ मन के हारे हार है, मन के जीते जीत..
_ खुश रहने के सबसे बड़े कारण फूल हैं, तुम एक छोटा सा गमला लो, उसमें मिट्टी डालो, बीज रोपो और उसके खिलने का इंतजार करो..
_ देखना उसके खिलने तक तुम्हारी सारी उदासियां, सारी बेचैनिया खत्म हो जाएंगी..
_ मन बहुत ही मासूम है, हृदय बहुत ही कोमल..
_ एक उम्मीद ही तो पालनी है ?
_ देखना तुम एक दिन फिर से एक नए जीवन में प्रवेश करोगे,
_ देखना एक बार फिर से तुम जी उठोगे और खिलखिलाकर हंसोगे..!!

सुविचार 351

उलझने वहीँ पैदा होती हैं, जहाँ हम अपना जीवन जीते- जीते दूसरे का भी जीवन जीने लगते हैं और उम्मीद करने लगते हैं कि वह आँख मूंद कर हमारी हर बात माने.
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