सुविचार – सबसे अच्छा जो हम कर सकते हैं.. वह है बस रुकना. – 270

सबसे अच्छा जो हम कर सकते हैं.. वह है बस रुकना.

_ क्योंकि कभी-कभी किसी व्यक्ति को आपके साथ रहने के अलावा और कुछ करने की आवश्यकता नहीं होती है.
_ उन्हें बस यही राहत है कि कोई उनके लिए रुक रहा है.
_ और यह एक व्यक्ति के लिए बहुत कुछ हल करता है.
— वे आप जैसे किसी व्यक्ति को पाकर खुश और आभारी महसूस करते हैं,
_ जिसने किसी भी चीज़ से पहले.. उनकी परवाह की.
_ वे किसी के लिए प्राथमिकता बनने से खुश हो जाते हैं.
_ आज के दौर में ये बहुत बड़ी बात है.
_ जहां किसी के पास खुद के लिए भी समय नहीं है,
_ फिर भी अगर कोई आपके लिए समय निकाल रहा है,
_ बाकी चीजें छोड़कर आपको चुन रहा है. ‘तो आप भाग्यशाली है.’
_ बस रहकर किसी को भाग्यशाली महसूस कराएं;
_ आपको कुछ भी कहने या सुनने की ज़रूरत नहीं है.
_ रहना ही काफी है; इसे दूसरों के लिए करें,

सुविचार 267

आप किसी के दिल को जख्मी करेंगे तो वह मौका मिलते ही पलट कर वार जरुर करेगा, समझदारी व दूरदर्शिता दिखाते हुए इस तरह के दुष्चक्र में न फंसें.

सुविचार – Generation Gap – जेनरेशन गैप – पीढ़ी का अंतर – 266

वक़्त-वक़्त की बात है. पहले पैसा कीमती था, अब समय कीमती है. अब समय को बचा कर उसी समय में व्यक्ति खर्च करने से ज़्यादा कमा सकता है तो समय क्यों न बचाए ?

Generation Gap
Father used to walk 20 minutes to save Rs. 20. Son spends Rs. 20 to save 20 minutes. Surprisingly both are correct.

सुविचार – संसार की भागदौड़ – 265

1. संसार की भागदौड़ अंत में थकान, बीमारी और खालीपन ही देती है –

फिर भी मनुष्य उसी में उलझा रहता है.
2. बाहरी यात्रा का अंत अक्सर निराशा है,
और वही भीतर की यात्रा का द्वार बनती है.
3. लोग दौड़ रहे हैं, पर कहाँ—यह किसी को नहीं पता.
शायद रुककर आँखें बंद करना ही पहली समझ है.
4. दुनिया को समझना है तो आँखें खोलकर नहीं,
कभी-कभी उन्हें बंद करके देखना पड़ता है.
5.भीड़ में रहकर भी जो भीतर की शांति खोज ले,
वही सच में जागने की दिशा में है.
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