सुविचार 412

इंसान को अपनी औकात भूलने की बीमारी है और कुदरत के पास उसे याद दिलाने की अचूक दवा.

सुविचार 411

हमें ये समझना होगा कि आज दुनिया में जितने भी आविष्कार हुए हैं. जितने भी प्रोडक्ट हम इस्तेमाल कर रहे हैं, किन्ही के दिमाग़ में एक आइडिया आया और उन्होंने उस पर काम शुरू किया. इसलिए वह चीज साकार हो पायी.

सुविचार 410

अधिक से अधिक निर्दोष, कम ज्ञानी और अधिक बालसुलभ बनें ;

_ जीवन को मजे के रूप में लें – क्योंकि यही ठीक है !

सुविचार 408

जब आस- पास में समाज के, परिवार के हालात ख़राब होने लग जायँ, ऎसी स्थिति में ही तो आपको मन की धीरता को बना के रखना होता है. रब पर विश्वास और कर्म के सिद्धान्त के ऊपर निश्चय बनाए रखना है.

सुविचार 407

उत्तेजित दिमाग ऐसे तिनके के समान हो जाता है, जिसे हवा कहीं भी उड़ा कर ले जा सकती है.
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